बल्कि आत्मा और परमात्मा के मधुर मिलन की अमूल्य अभिव्यक्ति माना है। यह ग्रंथ साधकों के लिए भक्ति के उच्चतम भाव – गोपी-भाव की ओर प्रेरणा देने वाला अमूल्य पथदर्शक है।
जिसे हनुमान प्रसाद पोद्दार जी (भाई जी) ने रचित किया है और गीता वाटिका द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक में भाई जी ने राधा और माधव के प्रेम और भक्ति के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है।
गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह ग्रंथ भगवान श्रीराम के चरित्र
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की महत्ता और उसे मनाने के तरीकों पर केंद्रित है। इस पुस्तक में जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है
जिसमें विभिन्न प्राचीन गीता-ग्रंथों का संग्रहीत रूप प्रस्तुत किया गया है। इसका पहला खंड (कोड 1958) लगभग 672 पृष्ठों का है और इसमें 25 दुर्लभ एवं मूल्यवान गीता-रूप ग्रंथों को शामिल किया गया है
Sadhan Path - 374 Gita press Gorakhpur बल्कि आत्मा और परमात्मा के( 374) , , , , , ,